संसद में तीन तलाक बिल पेश, क्या कहना है मुस्लिम महिलाओं का

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सरकार ने संसद में तीन तलाक़ बिल पेश कर दिया है.लोकसभा में क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हंगामे के बीच गुरुवार को इसे लोकसभा में पेश किया. इस बिल को लेकर अॉल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने विरोध जताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। वहीं मुस्लिम महिलाएं इस बिल को और आज के दिन को ऐतिहासिक दिन बता रही है।

आगरा की रहने वाली पीड़ित फैज़ा खान ने बताया कि हम बहुत ही खुश हैं कि मोदी जी और योगी जी के द्वारा मुस्लिम महिलाओं के लिए यह कदम उठाया गया। आज का यह दिन हमारे लिए ईद और बकरीद से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

लखनऊ की रहने वाली तीन तलाक पीड़ित हुमा खायनत ने कहा कि हमारी तरह की महिलाएं जिन्हें तलाक दे दिया गया और वे जिन्हें तीन तलाक के नाम पर डराया जाता है, उन्हें इस बिल से फायदा होगा। घरेलू हिंसा कानून की तरह अगर तीन तलाक विरोधी कोई कानून बनता है तो हमें राहत मिलेगी।

सामाजिक कार्यकर्त्ता शबनम पांडेय का कहना है कि बहस इस बात पर नहीं होनी चाहिए कि अन्य धर्मों में भी ऐसी कुरीतियां हैं। अगर अन्य धर्मों में भी कुरीतियां है तो यह बहाना नहीं बनना चाहिए कि कानून न बने। अगर कानून बनता है तो इसमें ऐतराज क्या है।

इस मामले पर अॉल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के सेक्रेटरी जफरयाब जिलानी विरोध जताते हुऐ कहा कि देश के मामले में लोग अपनी बात कहते हैं और सरकार अपना काम कर रही हैं। हम बिल को पेश होने के बाद देखेंगे क्या करना है। हम आखिरी दिन तक बिल का विरोध करेंगे। बिल का पेश होना या पास होना आखिरी रास्ता नहीं है। प्रधानमंत्री का अपना एजेंडा है, उनके सामने 2019 का चुनाव है।

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