महेंद्र नाथ पांडेय बने यूपी बीजेपी अध्यक्ष

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने केंद्रीय राज्य मंत्री तथा सांसद महेन्द्र नाथ पांडेय को उत्तर प्रदेश बीजेपी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। उन्हें यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की जगह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो अभी तक यह प्रभार संभाल रहे थे। यूपी की चंदौली सीट से सांसद तथा केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री महेन्द्र नाथ पांडेय के प्रदेश अध्यक्ष का प्रभार तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। पार्टी ने दो वर्ष बाद होने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए महेन्द्र नाथ को यह जिम्मेदारी सौंपी है। अब उनके कंधों पर 2014 के आम चुनावों के प्रदर्शन को दोहराने की जिम्मेदारी रहेगी। प्रदेश अध्यक्ष के लिए महेन्द्र नाथ पांडेय के अलावा जिन नामों पर चर्चा चल रही थी, उनमें संजीव बालियान, स्वतंत्र देव सिंह और अशोक कटारिया भी प्रमुख तौर पर शामिल थे। महेंद्र नाथ पांडेय को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे पार्टी के हाथ से ब्राह्मण वोट बैंक को साधना तथा उनका पूर्वी यूपी से होना मुख्य वजह माना जा रहा है।

महेन्द्र नाथ पांडेय को बीजेपी अध्यक्ष बना कर पार्टी ने सूबे के सवर्ण मतदाताओं को साधने की कोशिश की है. प्रदेश में करीब 22 फीसदी सवर्ण वोटर हैं. इनमें करीब 12 फीसदी ब्राह्मण मतदाता हैं, जो बीजेपी का कोर वोट माना जाता है. इन्हीं कोर वोटर के मद्देनजर महेंद्र नाथ पांडेय को पार्टी की कमान सौंपी गई है. इतना ही नहीं मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले कलराज मिश्र जो यूपी के मजबूत ब्राह्मण चेहरा माने जाते थे, उनकी जगह भरने के मद्देनजर भी इसे देखा जा रहा है.

संघ की पृष्ठभूमि- नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पाण्डेय का जन्म यूपी के गाजीपुर के पखनपुर गांव में हुआ. वह संघ के आगंन में पले बढ़े हैं. छात्र जीवन से ही आरएसएस से जुड़ गए थे और संघ की लगने वाली शाखा में बाकायदा भाग लेते थे. इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के खिलाफ आंदोलन किया था और कई महीने उन्हें जेल में रहना पड़ा था. अयोध्या रामजन्म भूमि आंदोलन से भी महेंद्र नाथ जुड़े रहे हैं.

सामंजस्य बैठाने की कोशिश- राजपूत समाज से ताल्लुक योगी आदित्यनाथ को यूपी के सीएम बनाए जाने के बाद से सूबे का ब्राह्मण समाज बेचैन महसूस कर रहा था. सूबे में डीजीपी सहित काफी जिलों में राजपूत समाज के जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक बनाए जाने के बात बहस शुरु हो गई थी. इतना ही नहीं गोरखपुर में ब्राह्मण नेता हरिशंकर तिवारी के घर पर पुलिस के छापेमारी और रायबरेली में 5 ब्राह्मणों की हत्या से ब्राह्मणों नें बीजेपी के प्रति नाराजगी बढ़ रही थी. इसके अलावा कई ब्राह्मण मंत्री योगी सरकार में है, लेकिन ब्राह्मण समाज में उनकी छवि नेता के तौर पर नहीं रही. ऐसे में राजपूत और ब्राह्मण समाज के बीच सामंजस्य बनाने में महेंद्र नाथ पांडेय कितना सफल हो पाएंगे?

मोदी-शाह के भरोसेमंद- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के महेंद्र नाथ पांडेय करीबी माने जाते हैं. इसी मद्देनजर उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में चंदौली से उम्मीदवार बनाया गया था. जबकि टिकट मिलने के बाद भी पांडेय चुनाव लडऩे से हिचकिचा रहे थे, लेकिन अमित शाह के समझाने के बाद उन्होंने पर्चा भरा और जीतकर लोकसभा पहुंचे. इसके बाद उन्हें मोदी ने अपनी कैबिनेट में जगह दी और मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री का जिम्मा सौंपा गया था.

संघर्षशील और जमीनी नेता-  महेंद्र नाथ पांडेय की छवि संघर्षशील और जमीनी नेता की रही है. वह छात्र जीवन से ही सियासत में कदम रख दिया था. वह सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज में 1973 में अध्यक्ष चुने गए और 1978 में बीएचयू के छात्रसंघ का चुनाव जीतकर महामंत्री बने. 1991 में वह पहली बार बीजेपी के टिकट से विधानसभा चुनाव लड़े थे. कल्याण सिंह सरकार में यूपी में वह मंत्री भी रह चुके हैं.

अध्यक्ष बनते ही चुनावी मोड में आई भाजपा,

2019 की तैयारियां शुरू

डॉ. महेंद्र पांडेय के अध्यक्ष बनने के साथ ही पूरी प्रदेश भाजपा चुनावी मोड में आ गई है। पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्षों, क्षेत्रीय संगठन मंत्रियों और प्रदेश महामंत्रियों की यहां हुई बैठक में नवंबर में प्रस्तावित निकाय चुनाव और 2019 में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कई तरह की योजनाओं को अंतिम रूप दिया गया। संगठनात्मक मजबूती के मद्देनजर रणनीति बनाकर पार्टी नेताओं की जिम्मेदारियां भी तय की गईं। यह भी निर्णय लिया गया कि लोकसभा चुनाव के लिए अलग से करीब सौ विस्तारकों की नियुक्ति की जाए। यह पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों में संगठनात्मक जरूरतों तथा अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करेंगे। साथ ही लोकसभा चुनाव के मद्देनजर स्थानीय संगठन के बीच सेतु का काम करेंगे। क्षेत्रीय संगठनों की बैठकें शुरू हो गई हैं। काशी क्षेत्र की बैठक वाराणसी में हुई। संगठन महामंत्री सुनील बंसल की मौजूदगी में हुई इस बैठक में निकाय चुनाव के मद्देनजर वाराणसी और इलाहाबाद नगर निगम के साथ इस क्षेत्र में आने वाली नगर पालिका परिषदों तथा नगर पंचायतों के राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों की जानकारी ली गई। मौजूदा महापौर या निकाय अध्यक्ष की जीत के समीकरण क्या थे और इस बार जीत का क्या गणित है। भाजपा के लिहाज से कैसे समीकरण हैं और जीत सुनिश्चित करने के लिए और क्या  करने की जरूरत है.

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