INS कलवरी से भारतीय नौसेना को और मजबूती मिलेगी : PM नरेंद्र मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कलवरी के विकास में लगे सभी कर्मचारियों को शुक्रिया कहा. आईएनएस कलवरी भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते राजनीतिक रिश्ते का सबूत है. आईएनएस कलवरी से भारतीय नौसेना का और मजबूती मिलेगी.आज सवा सौ करोड़ भारतीयों के लिए बहुत गौरव का दिन है. मैं सभी देशवासियों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बहुत-बहुत बधाई देता हूं.INS कलवरी पनडुब्बी को राष्ट्र को समर्पित करना, मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है. मैं देश की जनता की तरफ से भारतीय नौसेना को भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं अर्पित करता हूं. कलवरी की शक्ति, या कहें टाइगर शार्क की शक्ति हमारी भारतीय नौसेना को और मजबूत करेगी. यह मेक इन इंडिया का उत्तम उदाहरण है.पीएम ने कहा कि सबका साथ-सबका विकास का हमारा मंत्र जल-थल-नभ में एक समान है। पूरे विश्व को एक परिवार मानते हुए, भारत अपने वैश्विक उत्तरदायित्वों को लगातार निभा रहा है. कलवरी का नाम हिंद महासागर में पाई जाने वाली खतरनाक टाइगर शार्क के नाम रखा गया है. नौसेना की परंपरा के मुताबिक शिप और सबमरीन के सेवामुक्त होने पर उन्हें दोबारा अवतरित किया जाता है. वैसा ही कलवरी के साथ भी हुआ.पहली कलवरी 8 दिसंबर 1967 में भारतीय नौसेना में शामिल हुई थी और यह भारत की पहली सबमरीन भी थी. इसे 31 मार्च 1996 को 30 साल की राष्ट्रसेवा के बाद भारतीय नौसेना से रिटायर किया गया.कलवरी के निर्माण के साथ एमडीएल ने सबमरीन के कॉम्लेक्स ऑर्ट में अपनी महारत साबित कर दी है. भारत अब सबमरीन बनाने वाले देशों में अपनी जगह मजबूत कर चुका है. एमडीएल ने दूसरी स्कार्पीन खांदेरी बनाई थी और इसे जनवरी 2017 में लॉन्च किया गया था. खांदेरी का अभी समुद्र में ट्रायल चल रहा है.पहली कलवरी 8 दिसंबर 1967 में भारतीय नौसेना में शामिल हुई थी और यह भारत की पहली सबमरीन भी थी. इसे 31 मार्च 1996 को 30 साल की राष्ट्रसेवा के बाद भारतीय नौसेना से रिटायर किया गया.

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