सुशासन है तो शेखपुरा के ऐसे बेलगाम अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं

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बिहार के शेखपुरा जिला कृषि पदाधिकारी लाल बच्चन राम की एक ऑडियो क्लीप सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है.
इस ऑडियो में यह अफसर अपने अधीनस्थ डाटा इंट्री ऑपरेटर को बड़ी बदतमीजी से मां-बहन समेत सभी प्रकार के भद्दी-भद्दी गालियों के साथ जुतियाने के साथ जान मारने की सामंती मानसिकता का साफ परिचय दे रहा है ।
हालाकी इस ऑडियो की वायरलता को अखबारों व न्यूज चैनलों की सुर्खियों मिल चुकी है .लेकिन अभी तक इस मामले में कोई जांच – कार्रवाई नहीं होना छद्म सुशासन पर कड़े सवाल उठाते हैं ।

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शेखपुरा जिला कृषि कार्यालय में डाटा इन्ट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत प्रभात कुमार सिन्हा ने इसकी शिकायत विगत 2 अप्रैल को बिहार के कृषि उत्पादन आयुक्त से की है । शिकायत के साथ अत्यंत असभ्य बातचीत की वीडियो भी संलग्न की गई है ।
कहते हैं कि जब ऑपरेटर की शिकायत को सरकारी स्तर पर गंभीरता से नहीं लिया गया तो उसने जिला कृषि पदाधिकारी के साथ हुई बातचीत को सोशल साईट ग्रुपों में डाल दिया जहां से वह देखते ही देखते काफी तेजी वायरल हो गया ।
वायरल उक्त ऑडियो से साफ स्पष्ट संस्कार हीनता की छांव में पले-बढ़े अफसर आज कल गुंडा-मवाली से वद्दतर होते जा रहे हैं ।
इसके पूर्व शेखपुरा नगर थाना प्रभारी ने सोशल मीडिया ग्रूपमे अपने सरकारी नंबर से आपत्तिजनक भड़काऊ पोस्ट किए । एसटी- एसी की बंदी के ठीक पहले उसने पोस्ट किया कि ‘भागो दलितों भागो,हिन्दू धर्म त्यागो’।
यह मामला भी काफी गर्म हुआ लेकिन ,कहीं से कोई कार्रवाई नहीं हुई । जबकि कोई आम आदमी होता तो नीचे से ऊपर तक का महकमा उसे साइबर कानून की आड़ में जकड़ लेता ।
ऐसे में सुशासन के ढिंढोरे पिटने वाले नेताओं – अफसरों की वेशर्मी की हद ही कहेंगे । उनकी कथनी और करनी में आसमान -जमीन का फर्क साफ नजर आता है ।

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