डाॅ.वेदांती ने श्री श्री रविशंकर प्रसाद को आड़ें हाथों लिया

पूर्व सांसद राम विलास वेदांती ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर प्रसाद को आड़ें हाथों लेते हुए कहा कि  इस मुद्दे पर रविशंकर प्रसाद को मध्यस्थता निभाने का कोई अधिकार नहीं क्योंकि इसके लिए लाखों लोगो  ने अपनी जान की कुर्बानी दी है। न कि रविशंकर प्रसाद ने।

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य और भारतीय जनता पार्टी से दो बार सांसद रहे डॉ. रामविलास दास वेदांती ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में बड़ा बयान दिया है। अयोध्या के संतों का एक प्रतिनिधिमंडल आज जहां लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने आया है, वहीं फैजाबाद में भाजपा के पूर्व सांसद ने बड़ा बम फोड़ा है। अयोध्या के विवादित ढांचा गिराने की साजिश में सीबीआई जांच में पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती को भी शामिल किया गया है।
रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ, सदस्य पूर्व सांसद एवं मंदिर आंदोलन के अग्रणी नेता डाॅ. रामविलासदास वेदांती ने दावा किया कि 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा उन्होंने ही तोड़ा और तोड़वाया था। वे नयाघाट स्थित अपने आवास हिन्दूधाम में पत्रकारों से मुखातिब थे। डाक्टर वेदांती ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें लालकृष्ण आडवाणी, मुरलीमनोहर जोशी समेत 13 नेताओं के खिलाफ ध्वंस की साजिश रचने का मामला चलाये जाने की सीबीआई को इजाजत दी गई है।
उन्होंने कहा कि मैं रामलला से यह प्रार्थना जरूर करूंगा कि भारत सरकार और प्रदेश सरकार को ऐसी दिशा मिले कि रामजन्मभूमि पर जल्द से जल्द मंदिर का निर्माण हो। उन्होंने सरकार से विवादित स्थल के इर्द-गिर्द अधिग्रहीत 67.77 एकड़ जमीन रामजन्मभूमि न्यास को सौंपने की भी मांग की, ताकि इस भूमि पर राममंदिर निर्माण शुरू किया जा सके। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जजों को चुनौती दी कि ध्वंस के समय के साक्ष्यों का अयोध्या आकर पुनर्वलोकन करें। डाॅ.वेदांती ने सीबीआई की नीयत पर भी सवाल खड़ा किया और कहा कि सीबीआई की झूठी गवाही पर जजों ने फिर मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।

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