कांग्रेस ने “सिब्बल” को सुनाया फरमान, “बाबरी मस्जिद विवाद” की छोड़े पैरवी

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देश की सबसे पुरानी नेशनल पार्टी का रूतबा रखने वाली कांग्रेस पार्टी अब देश में ही अपनी जमीन तलाशने को मजबूर हो गई है । आगामी चुनावों में जीत के लिए जहां राहुल गांधी मंदिर-मस्जिद की परिक्रमा कर रहे हैं , तो वहीं पार्टी के कद्दावर नेताओं को भी निर्देश जारी किए जा रहे है । वो अपनी हर गतिविधि चुनावो को देखते हुए करें। जी हां, सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल को निर्देश दिया है कि वो जल्द से जल्द बाबरी मस्जिद विवाद की पैरवी करना छोड़ दे ।

दरअसल बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद से जुड़े केस में सुन्नी वक्फ बोर्ड की पैरवी कर रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता और वकील कपिल सिबल को यह केस छोड़ने के लिए कहा गया है।पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, सिब्बल से कहा गया है कि इस केस से हाथ अपने खींचना ही राजनीतिक रूप से उनके लिए समझदारी भरा कदम होगा।

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इस हिदायत को अब राजनीतिक पंडित कर्नाटक चुनाव से जोड़ कर देख रहे हैं । क्योंकि बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अकसर ही सिब्बल सहित कई कांग्रेसी नेताओं की कोर्ट में भूमिका को लेकर राजनीतिक प्रहार करते रहे हैं ।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस केस में सिब्बल की दलीलों को लेकर गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान भी काफी आलोचना हुई थी। तब सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से पैरवी करने वाले सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि कोर्ट के फैसले का ‘बहुत गहरा असर’ होगा, लिहाजा इस मामले की सुनवाई 2019 के चुनावों के बाद की जाए । तब मोदी ने कहा था कि क्या सिब्बल का राम मंदिर को चुनावी राजनीति से जोड़ना सही है।

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