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आम आदमी यदि अपने अधिकार नहीं जानेगा, तो फिर अपना जीवन कैसे व्यतीत करेगा? भारत में साक्षरता की अभी भी कमी है। लोग अपने अधिकार को ले कर जागरूक नहीं है। मीडिया भी जनता को उनके अधिकारों को ले कर न सूचित करती है न शिक्षित।

ऐसे में हमने ऑल राइट्स की परिकल्पना की। ऑल राइट्स यानी जनता के सारे अधिकार को हमने एक मैग्जीन में देने का फैसला किया। मैग्जीन ख़ुद ही अपने नाम के पीछे का औचित्य सिद्ध कर चुका है। आजकल पत्रकारिता पर सवाल उठ रहे है। जैसे पेड न्यूज, निजी संबंधों के लाभ के लिए खबर चलाना, महत्वपूर्ण सूचनाएं और खबरें जनता तक पहुंचती ही नहीं हैं।

जनता भी इस बात को समझने लगी है कि पत्रकारिता खतरे में है। आमजन का मीडिया पर विश्वास कम हो रहा है। वही मीडिया जो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ होने का दम भरता था, अपनी विश्वसनीयता खोता जा रहा है। ऐसे में ऑल राइट्स न सिर्फ अपने एपत्रकारीय जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा है बल्कि जनता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक भी कर रहा है।