23 जनवरी को ‘ देश प्रेम दिवस ‘ घोषित किया जाए

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30 दिसम्बर 2017 उड़प्पीरेस्टुरेंट , नवयुग मार्किट गाज़ियाबाद – आज यहाँ एक प्रेस वार्ता  को सम्बोंधित करते हुए राष्ट्रीय सैनिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीर चक्र प्राप्त कर्नल तजेंद्र पाल त्यागी ने देश और सरकार दोनों का आहवाहन किया कि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के जन्मदिन 23 जनवरी को अविलम्ब  ‘ देश प्रेम दिवस ‘  घोषित कर दिया जाना चाहिए | उन्होंने कहा कि जून 1940 में जेल से छूटते ही नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ने ऐलान किया कि वो कलकत्ता में   ‘ हालवेल ‘ नाम के स्मारक को तोड़ने के लिए स्वंय शामिल होंगें  | उनका मानना था कि ‘  हालवेल ‘  स्मारक सिराजूदौला पर अग्रेजो कि विजय और हमारी दास्ता का प्रतीक हैं | यह घोषणा होते ही नेता जी को पुनः गिरफ्तार कर लिया गया परन्तु उनके अनुयायिओ ने वो उत्पात मचाया कि अंग्रेजो को स्वंम हालवेल मानुमेंट को हटाना पड़ा |  पूरी दुनिया के इतिहास में क्या एक भी ऐसी मिसाल है कि विजेता अपना विजय स्तम्भ स्वंय हटा दे और वो भी उसके डर से जो जेल में बंद हो| इतने बड़े देशभक्त नेता जी सुभाष चन्द्र बोस का जन्मदिन अब ‘ देश प्रेम दिवस ‘ के रूप में ही  मनाया जाएगा |

  राष्ट्रीय सैनिक संस्था के सचिव  राजेंद्र बगासी ने बताया कि सरकारे झूठ बोलती है | देश के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरु नहीं थे बल्कि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस थे  जिन्होंने 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर के कैथले हॉल में आजाद हिन्द सरकार का गठन किया था और जिसे 9 देशो ने तुरंत मान्यता दे दी थी | पहले प्रधानमंत्री नेताजी सुभाषचंद्र बोस थे | इतना ही नही , 30 दिसम्बर 1943 को नेता जी ने आजादी का तिरंगा अंडमान और निकोबार में पोर्ट ब्लेयर में  फैराया था |

श्री मती डा. पूनम शर्मा , जिला अध्यक्ष राजाराम , कोष अध्यक्ष पी.पी.सिंह , सविता शर्मा कुमार आर.एस.एस. की महिला विग्रेट मीडिया प्रभारी  , एस.पी.एस. राघव ने एक स्वर में कहा कि नेता जी प्रत्येक युवक को सैनिक शिक्षा देना चाहते थे | आज तक की सरकारों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया | छोटे स्तर पर ही सही ,  बिना साहयता के ही सही , छोटा सैलेबस ही सही और छोटी कोशिश ही सही , राष्ट्रीय सैनिक संस्था ने प्रारम्भिक सैनिक प्रशिक्षण देने का कार्य 2016 से शुरू कर दिया गया है और अब तक 6 कोर्स चला चुके है |

   प्रेस कांफ्रेंस के इस अवसर पर उपस्थित लोगो कि सूची संलगन हैं | नेता जी के वंशज श्री सी.के.बोश भी हमारे इस अभियान में हमारे साथ हैं | शुभा अग्रवाल के शंखनाद के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ | 

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